द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : दुनिया में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों के बीच भारतीय नौसेना ने अपनी अंडरवॉटर क्षमताओं को और मजबूत किया है। भारतीय नौसेना ने 31 अगस्त 2026 को मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में स्वदेशी रूप से निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) INS Nipun को आधिकारिक तौर पर कमीशन किया।
इस मौके पर नेवल स्टाफ के प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि एक ‘फाइटिंग नेवी’ के रूप में युद्ध के लिए तैयार रहना नौसेना की सबसे बड़ी जिम्मेदारी और प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भारत रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और समुद्री क्षेत्र में चुनौतियों और टकराव का स्वरूप लगातार बदल रहा है।
एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि भविष्य में देश के सामने आने वाले खतरों का सटीक अनुमान लगाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन संभावित खतरों से निपटने के लिए पहले से तैयार रहना निश्चित रूप से संभव है। उनके मुताबिक, नौसेना को ऐसी भरोसेमंद ऑपरेशनल और कॉम्बैट क्षमता विकसित करनी होगी, जो किसी भी समय और किसी भी स्थान पर भारत की सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा कर सके।
INS Nipun से बढ़ेगी भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर क्षमता
INS Nipun को दो जहाजों वाले डाइविंग सपोर्ट वेसल प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है। नौसेना के मुताबिक, इसका पश्चिमी नौसेना कमान के तहत भारत के पश्चिमी तट पर संचालन किया जाएगा। नौसेना प्रमुख ने INS Nipun की कमीशनिंग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह जहाज भारतीय नौसेना की विशेष अंडरवॉटर क्षमताओं को मजबूत करेगा। समुद्री क्षेत्र में बदलते खतरों को देखते हुए ऐसी क्षमताएं भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि INS Nipun जैसी क्षमता का नौसेना में शामिल होना महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूत एवं विश्वसनीय क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बदलते समुद्री खतरों के बीच तैयारी पर जोर
एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने समुद्री वातावरण में बढ़ती चुनौतियों और टकराव का जिक्र करते हुए कहा कि खतरों का स्वरूप लगातार बदल रहा है। ऐसे में नौसेना की प्राथमिकता ऐसी क्षमताएं तैयार करना है, जो संभावित परिस्थितियों में तेजी और प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया देने में सक्षम हों।
INS Nipun की तैनाती से पश्चिमी तट पर नौसेना की अंडरवॉटर क्षमताओं में इजाफा होने की उम्मीद है। नौसेना प्रमुख के बयान से साफ है कि बदलते रणनीतिक और समुद्री माहौल के बीच भारतीय नौसेना अपनी ऑपरेशनल तैयारियों और आधुनिक क्षमताओं को लगातार मजबूत करने पर जोर दे रही है।




