द लोकतंत्र/ भोपाल : मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत अपील की अनदेखी करने पर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मध्य प्रदेश सरकार ने सौभाग्य सिंह ठाकुर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनके प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रहित में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करना गंभीर विषय है। सरकार ने साफ किया कि जब देश ईंधन बचत और संसाधनों के संयमित उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को सादगी और अनुशासन का उदाहरण पेश करना चाहिए।
सरकार के अनुसार, जांच पूरी होने तक सौभाग्य सिंह ठाकुर पाठ्य पुस्तक निगम से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण आदेश को मंजूरी नहीं दे सकेंगे। इसके अलावा उन्हें निगम कार्यालय, सरकारी वाहन, सरकारी संसाधनों, बैठकों और कर्मचारियों के उपयोग से भी वंचित कर दिया गया है।
सरकार ने रैली को बताया फिजूलखर्ची और अनुशासनहीनता
मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में दिखावा और फिजूलखर्ची को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि शासन की सादगी नीति के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, हाल ही में पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने के दौरान सौभाग्य सिंह ठाकुर ने लगभग 200 गाड़ियों के बड़े काफिले के साथ रैली निकाली थी। बताया गया कि वह अपने समर्थकों के साथ उज्जैन से भोपाल तक विशाल वाहन रैली के जरिए पहुंचे थे।
इस रैली की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे, जिसके बाद विपक्ष के साथ-साथ आम लोगों ने भी सवाल उठाए थे। आलोचकों का कहना था कि जब प्रधानमंत्री खुद पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील कर रहे हैं, तब इतनी बड़ी वाहन रैली निकालना गलत संदेश देता है।
पीएम मोदी ने ईंधन बचत की थी अपील
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को हैदराबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों को देखते हुए लोगों को पेट्रोल और डीजल का उपयोग सीमित करना चाहिए।
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद कई राज्यों में सरकारें प्रशासनिक खर्चों में कटौती और ईंधन बचत को लेकर नए कदम उठा रही हैं। मंत्रियों के काफिलों में कटौती, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा और अनावश्यक यात्रा सीमित करने जैसे फैसले लगातार लिए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सौभाग्य सिंह ठाकुर पर की गई कार्रवाई के जरिए मध्य प्रदेश सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी लाइन और सरकारी नीतियों के खिलाफ जाने वालों पर सख्ती बरती जाएगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।

