द लोकतंत्र/ पटना : Bihar की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए बड़े बदलाव पर अब भी चर्चा जारी है। Nitish Kumar के इस्तीफे और राज्यसभा जाने के फैसले के बाद Samrat Choudhary के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो चुका है। इस बीच Janata Dal (United) ने स्पष्ट किया है कि भाजपा को मुख्यमंत्री पद सौंपना राजनीतिक रणनीति और पुराने सहयोग का परिणाम है।
जदयू के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Choudhary ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा पुरानी सहयोगी है और 2020 विधानसभा चुनाव के बाद उसने जदयू का समर्थन किया था, जब पार्टी की सीटें काफी कम हो गई थीं। ऐसे में अब भाजपा को समर्थन देकर ‘सहयोग के बदले सहयोग’ किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार 24 अप्रैल को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करेगी और इसके लिए एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।
विजय चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास प्रचंड बहुमत है, इसलिए सरकार का विश्वास मत जीतना तय है। उन्होंने यह भी कहा कि नई सरकार को नीतीश कुमार का आशीर्वाद प्राप्त है और यह सरकार उनके पदचिह्नों पर ही चलेगी।
तेजस्वी के आरोपों, शराबबंदी और निशांत कुमार की यात्रा पर JDU का जवाब
Vijay Kumar Choudhary ने नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav के उस आरोप का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार का खजाना खाली हो चुका है और नई सरकार को कर्ज में डूबा राज्य मिला है। विजय चौधरी ने कहा कि विकास कार्यों के लिए सभी सरकारें कर्ज लेती हैं और इससे घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने राजद शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सरकारी कर्मचारियों को वेतन देना भी चुनौती बन गया था।
शराबबंदी कानून को लेकर गठबंधन और पार्टी विधायकों की समीक्षा संबंधी मांग पर भी उन्होंने सफाई दी। चौधरी ने कहा कि व्यक्तिगत बयानों को सरकार या पार्टी की आधिकारिक राय नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक नेता, पार्टी और सरकार तीन अलग-अलग इकाइयां हैं।
वहीं Nishant Kumar की प्रस्तावित यात्रा को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे ‘जदयू बचाओ यात्रा’ के आरोपों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार सक्रिय नेता हैं और उनका बिहार दौरा स्वाभाविक है। जदयू उनके इस फैसले का स्वागत करती है। बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में विश्वास मत, विपक्ष की रणनीति और नई सरकार के फैसले राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

