द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल (लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026) पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने छात्र आंदोलन, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार से कई सवाल पूछे। इस दौरान नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री से जानना चाहती हैं कि छात्रों पर लाठीचार्ज और कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऐसे कदम उठाने का आदेश किस स्तर पर दिया गया। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर सदन में अलग रुख रखा गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई।
Priyanka Gandhi ने शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलन और परीक्षा प्रणाली पर सरकार को घेरा
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार गड़बड़ियों के बावजूद दोषियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिक्षा व्यवस्था में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें संवाद के माध्यम से समाधान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अधिक गंभीरता दिखानी चाहिए।
इसी दौरान प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं से जुड़े एक पुराने मुद्दे पर उनके कथित रुख को लेकर सवाल उठते हैं और ऐसे व्यक्ति पर लोग भरोसा कैसे करेंगे। यह टिप्पणी होते ही सदन में सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया।
प्रह्लाद जोशी और किरेन रिजिजू ने जताई आपत्ति, स्पीकर ने कराया हस्तक्षेप
प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण के किसी मंत्री पर इस प्रकार का आरोप लगाना उचित नहीं है और प्रियंका गांधी को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए। इसके बाद स्वयं केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी हस्तक्षेप करते हुए प्रियंका गांधी से अपने आरोपों का प्रमाण सदन में प्रस्तुत करने को कहा। जवाब में प्रियंका गांधी ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देने की कोशिश की।
इस दौरान सदन में कुछ समय के लिए हंगामे जैसी स्थिति बन गई। बाद में लोकसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों पक्षों से आग्रह किया कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़ते हुए चर्चा को विधेयक के मूल विषय तक सीमित रखा जाए। स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद सदन की कार्यवाही फिर से एंटी पेपर लीक बिल पर केंद्रित हुई।
गौरतलब है कि लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कानूनी प्रावधानों को और सख्त बनाना है। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्र हितों को लेकर अपने-अपने विचार सदन के सामने रखे। वहीं, प्रियंका गांधी के भाषण और उस पर हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया ने संसद की कार्यवाही को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया।




