द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई और देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर दर्ज मामलों को लेकर राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर छात्र प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों को निशाना बनाना उचित नहीं है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के साथ मुंबई की चर्चित छात्र प्रदर्शनकारी रिया अहीर, नूतन टोप्पो, फराह नाज सहित विभिन्न राज्यों से आए छात्र भी मौजूद रहे। सभी ने आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और अपने अनुभव साझा किए। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी और किसी भी प्रकार की हिंसा का सहारा नहीं लिया, इसके बावजूद उनके साथ बल प्रयोग किया गया।
‘छात्रों ने कुछ गलत नहीं किया, उन्हें माफी मांगने की जरूरत नहीं’ – Rahul Gandhi
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने अलग-अलग राज्यों से आए छात्र प्रदर्शनकारियों से विस्तार से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई और किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं की। इसके बावजूद उनके साथ कथित तौर पर लाठीचार्ज किया गया, उन्हें धमकाया गया और कई जगहों पर कानूनी कार्रवाई की गई। उन्होंने छात्रों की ओर इशारा करते हुए कहा, “मुझे आप सभी पर गर्व है। आपने कुछ भी गलत नहीं किया है। इसलिए आपको किसी से माफी मांगने की जरूरत नहीं है। लोकतंत्र में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है।”
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ छात्रों और उनके परिवारों पर दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी नाबालिग छात्रा के घर जाकर उस पर माफी मांगने का दबाव बनाया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें भी छात्रों के सवालों का सीधे सामना करना चाहिए।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने सुनाई आपबीती, पुलिस कार्रवाई पर लगाए गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुंबई की छात्र प्रदर्शनकारी रिया अहीर ने कहा कि उन्होंने आंदोलन के दौरान कथित रूप से हिरासत में लिए जा रहे छात्रों की मदद करने की कोशिश की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया और उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उन्हें अब तक एफआईआर की प्रति नहीं मिली है।
एक अन्य प्रदर्शनकारी नूतन टोप्पो ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें पीछे से गोली जैसी वस्तु लगी, जिसे उन्होंने पेलेट गन की चोट बताया। उन्होंने कहा कि वे अन्याय के खिलाफ भविष्य में भी आवाज उठाती रहेंगी। वहीं फराह नाज ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उनके साथ बल प्रयोग किया गया। उनका कहना था कि हिरासत के दौरान उनसे उनके नाम और पहचान के आधार पर सवाल किए गए तथा उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि यदि कोई नागरिक शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की मांग करता है तो उसे देशद्रोही कहना गलत है।
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है और सरकार को छात्रों की मांगों को सुनने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक बहस जारी रहने की संभावना है।




