द लोकतंत्र/ पटना : पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने शुक्रवार (15 मई, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्टर जारी कर केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला।
आरजेडी द्वारा जारी पोस्टर में व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा गया कि ‘चाहे रेट पांच रुपये और बढ़ा दो मोदी जी, लेकिन काजू की रोटी के साथ पिस्ता, बादाम और छुहारे का अचार जरूर खाते रहिए।’ पोस्टर में यह भी कहा गया कि लगातार चुनाव प्रचार के कारण प्रधानमंत्री थक गए होंगे।
आरजेडी ने अपने पोस्ट के जरिए सरकार पर आरोप लगाया कि देश आर्थिक संकट और वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन सत्ता पक्ष के नेताओं की जीवनशैली और सरकारी खर्चों में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही। पार्टी ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “काजू की रोटी और आयातित मशरूम की सब्जी जारी रहे” और नेताओं के बड़े काफिलों पर भी सवाल उठाए।
सम्राट चौधरी और सरकारी खर्चों पर भी निशाना
आरजेडी ने अपने पोस्ट में सम्राट चौधरी का नाम लेते हुए बड़े काफिलों और सरकारी दिखावे पर भी तंज कसा। पार्टी ने कहा कि जब आम जनता महंगे पेट्रोल-डीजल से परेशान है, तब नेताओं के बड़े-बड़े वाहन काफिले और सरकारी खर्च जनता के बीच गलत संदेश दे रहे हैं।
पोस्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग (IT), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और चुनाव आयोग (ECI) का जिक्र करते हुए भी सरकार पर निशाना साधा गया। आरजेडी ने आरोप लगाया कि सरकार एजेंसियों और सत्ता से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती ईंधन कीमतें विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बनती जा रही हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा कई राज्यों की राजनीति में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
मनोज झा बोले- सरकार को जनता की संवेदनाओं से मतलब नहीं
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मनोज कुमार झा ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार को आम लोगों की परेशानियों और लोकसंवेदनाओं से कोई सरोकार नहीं है।
मनोज झा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव परिवहन, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ता है। उन्होंने “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार चुनाव होने से सरकार जनता के प्रति ज्यादा जवाबदेह रहती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार चुनावों से डरती है और जनता के मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही। राजनीतिक हलकों में अब पेट्रोल-डीजल कीमतों का मुद्दा केंद्र और विपक्ष के बीच नई बहस का कारण बनता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के चलते आने वाले समय में ईंधन कीमतों पर दबाव बना रह सकता है, जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है।

