द लोकतंत्र/ लाइफस्टाइल : बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते मानसिक तनाव के बीच यात्रा का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। जहां पहले छुट्टियों का मतलब ज्यादा से ज्यादा जगह घूमना, फोटो खींचना और हर दिन नई लोकेशन एक्सप्लोर करना होता था, वहीं अब युवा पीढ़ी खासकर Gen Z यात्रा को एक अलग नजरिए से देख रही है। अब ट्रैवल का उद्देश्य केवल नई जगहें देखना नहीं, बल्कि खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तरोताजा करना भी बन गया है। इसी सोच से एक नया ट्रेंड सामने आया है, जिसे ‘Room Rotting Trend’ कहा जा रहा है।
Room Rotting का मतलब है किसी खूबसूरत डेस्टिनेशन पर जाकर भी अधिकांश समय होटल, रिसॉर्ट या Airbnb के कमरे में आराम करना, बिना किसी भागदौड़ के छुट्टियों का आनंद लेना। यह ट्रेंड सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और कई ट्रैवल एक्सपर्ट इसे “स्लो ट्रैवल” की नई परिभाषा मान रहे हैं।
क्या है Room Rotting Trend और क्यों पसंद आ रहा है Gen Z को?
नाम सुनने में भले ही यह ट्रेंड थोड़ा अजीब लगे, लेकिन इसका उद्देश्य आलस करना नहीं बल्कि खुद को मानसिक रूप से रिचार्ज करना है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में पढ़ाई, नौकरी, करियर, सोशल मीडिया और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के दबाव ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाला है। ऐसे में छुट्टियां भी कई बार थकाऊ साबित हो जाती हैं क्योंकि लोग हर दिन अधिक से अधिक जगह घूमने की कोशिश करते हैं।
Room Rotting इस सोच से बिल्कुल अलग है। इसमें लोग बिना किसी तय कार्यक्रम के छुट्टियां बिताते हैं। देर तक सोना, पसंदीदा किताब पढ़ना, फिल्में देखना, होटल के कमरे या बालकनी में बैठकर प्राकृतिक नजारों का आनंद लेना, दोस्तों या परिवार के साथ लंबी बातचीत करना और बिना किसी जल्दबाजी के समय बिताना इस ट्रेंड का हिस्सा है।
Room Rotting Trend मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल डिटॉक्स बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि Room Rotting की लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ा कारण मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता है। लगातार स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया और व्यस्त दिनचर्या से थके हुए युवा अब छुट्टियों को रिकवरी टाइम की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं। इस ट्रेंड का एक अहम हिस्सा डिजिटल डिटॉक्स भी है। पहले ट्रैवल का मतलब सोशल मीडिया पर लगातार फोटो और वीडियो पोस्ट करना माना जाता था, लेकिन अब कई युवा छुट्टियों के दौरान फोन का कम इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। वे रील और पोस्ट बनाने की बजाय वास्तविक अनुभवों को जीना अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं।
Room Rotting में कोई तय नियम नहीं होता। कोई पूरा दिन होटल में आराम करता है, तो कोई शाम को हल्की सैर के लिए निकल जाता है। कभी दोस्तों के साथ देर रात तक बातचीत, कभी अचानक खाना ऑर्डर करना, तो कभी बालकनी में बैठकर बारिश या पहाड़ों का आनंद लेना—यही छोटे और अनियोजित पल इस ट्रेंड को खास बनाते हैं।
भारत में भी ऐसे कई डेस्टिनेशन हैं जहां यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। माउंट आबू, मनाली, कूर्ग, ऋषिकेश, साउथ गोवा, ऊटी, दार्जिलिंग, अलेप्पी, स्पीति वैली और लोनावला जैसी जगहें उन यात्रियों की पहली पसंद बन रही हैं जो भागदौड़ की बजाय सुकून भरी छुट्टियां बिताना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि Room Rotting यह संदेश देता है कि छुट्टियों का असली उद्देश्य केवल अधिक घूमना नहीं, बल्कि खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तरोताजा करना भी है। यही वजह है कि Gen Z अब “Travel More” की बजाय “Rest Better” की सोच को अपनाती दिखाई दे रही है।




