द लोकतंत्र/ रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डीडीयू ऑडिटोरियम में आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया और उनके संघर्षों पर आधारित स्मारिका ‘आपातकाल के योद्धा’ का विमोचन किया। साथ ही राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। समारोह में लोकतंत्र सेनानियों, उनके परिजनों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि उस दौर में लोकतंत्र सेनानियों ने जेल, उत्पीड़न और अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। उनका त्याग और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिया गया संघर्ष हमेशा रहेगा याद – Vishnu Deo Sai
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल इतिहास को याद करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य युवाओं को लोकतंत्र, संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व से परिचित कराना भी है। उन्होंने कहा कि आजादी और लोकतांत्रिक अधिकार बड़ी कुर्बानियों के बाद मिले हैं, इसलिए उनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
उन्होंने शिक्षा में आपातकाल से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को शामिल करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी देश के लोकतांत्रिक इतिहास को बेहतर ढंग से समझ सकेगी। मुख्यमंत्री ने अपने परिवार से जुड़ा एक भावनात्मक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय आपातकाल के दौरान 19 महीने तक जेल में रहे थे। उस समय परिवारों को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौर में स्वयंसेवक भेष बदलकर लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों तक भोजन और आवश्यक सामग्री पहुंचाते थे, ताकि कोई परिवार अभाव का शिकार न हो।
इंद्रेश कुमार ने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने का किया आह्वान
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि भारतीय समाज की मूल भावना है। उन्होंने युवाओं से इतिहास से सीख लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनुशासन, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
उन्होंने युवाओं से “राष्ट्र प्रथम” की भावना अपनाने और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की। वहीं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी अपने संबोधन में कहा कि 1975 का आपातकाल लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा थी, जिसने देश को लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और नागरिक अधिकारों के महत्व का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान आपातकाल विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। स्कूल वर्ग में रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त कर 31 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि हासिल की, जबकि कॉलेज वर्ग में रायपुर की कल्याणी पटले प्रथम रहीं।
मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि युवाओं की ऐसी रचनात्मक भागीदारी लोकतंत्र, संविधान और देश के इतिहास के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा तभी संभव है जब नई पीढ़ी इतिहास से सीख लेकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे।




