द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Aam Aadmi Party और Bharatiya Janata Party के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सभापति C. P. Radhakrishnan से उन सात राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है, जिन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। रविवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में Sanjay Singh ने इसकी जानकारी दी।
संजय सिंह ने कहा कि भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सात सांसदों की सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal और पूर्व राज्यसभा महासचिव व संविधान विशेषज्ञ P. D. T. Achary समेत कई विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होने पर सदस्यता समाप्त हो सकती है।
AAP ने सभापति से जल्द सुनवाई कर निष्पक्ष फैसला देने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर सांसदों पर दबाव बनाया गया और उन्हें भाजपा में शामिल कराया गया। संजय सिंह ने इसे लोकतंत्र, संविधान और पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात बताया।
BJP का पलटवार, शाहनवाज हुसैन बोले- AAP राज्यसभा में पूरी तरह साफ
AAP के आरोपों पर भाजपा ने भी पलटवार किया है। भाजपा नेता Shahnawaz Hussain ने कहा कि राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ सांसदों ने AAP छोड़ी है और भाजपा में शामिल हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब संजय सिंह अकेले पड़ गए हैं और उन्हें अपने साथियों की कमी खल रही है।
शाहनवाज हुसैन ने कहा कि पहले सदन में सिर्फ संजय सिंह ही बोलते थे और बाकी सांसदों को बोलने का मौका नहीं मिलता था। अब वे सांसद भाजपा में शामिल होकर खुलकर अपनी बात रख सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में AAP पूरी तरह से साफ हो चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में संसद और अदालत दोनों जगह बड़ा मुद्दा बन सकता है। अगर सभापति इस मामले में सुनवाई करते हैं तो दलबदल कानून की नई व्याख्या देखने को मिल सकती है। AAP और भाजपा के बीच यह सियासी संघर्ष पंजाब और दिल्ली की राजनीति पर भी असर डाल सकता है। फिलहाल सबकी नजर राज्यसभा सभापति के अगले कदम पर टिकी है।

