द लोकतंत्र/ सुदीप्त मणि त्रिपाठी : पत्रकार की पहचान उसके गले में लटकते प्रेस कार्ड से नहीं होती, न ही उस संस्थान की ऊँची इमारतों से जहाँ वह कार्यरत है।
द लोकतंत्र/ सुदीप्त मणि त्रिपाठी : Journalist Intellectual Property: शब्दों का श्रम, श्रम का स्वामित्व दरअसल पत्रकार की सबसे बड़ी पूंजी उसकी बुद्धि है, लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है
द लोकतंत्र: आज की व्यस्त जिंदगी में रिश्ते निभाना जितना जरूरी है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी होता जा रहा है। समय की कमी, भागदौड़ भरी दिनचर्या और डिजिटल डिवाइसेज़ की